Monday, May 25, 2026
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हरपालपुर सरकारी अस्पताल अव्यवस्था और लापरवाही का शिकार।भीषण गर्मी में बढ़ी मरीजों की संख्या, डॉक्टर नदारद बिना इलाज लौट रहे मरीज

अस्पताल में भर्राशाही मरीजों को नही मिल रहा इलाज। डॉक्टर ड्यूटी से नदारत।

भीषण गर्मी में मरीज बेहाल, डॉक्टर नदारद
बिना इलाज लौट रहे मरीज, स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल

हरपालपुर, छतरपुर (म.प्र.)।छतरपुर जिले के हरपालपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं ने शासन के स्वास्थ्य दावों की पोल खोल दी है। भीषण गर्मी और लू के बीच अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अस्पताल में न डॉक्टर समय पर उपलब्ध हैं और न ही बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं। शनिवार सुबह अस्पताल पहुंचे कई मरीजों को बिना इलाज और बिना जांच के ही वापस लौटना पड़ा।अस्पताल में अव्यवस्था का आलम यह है कि ओपीडी के निर्धारित समय सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं, लेकिन सुबह 11 बजे तक डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। इलाज के लिए घंटों इंतजार कर रहे मरीज और उनके परिजन परेशान नजर आए।मरीजों और परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में न तो समय पर डॉक्टर मिलते हैं, न पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं और न ही जांच की समुचित व्यवस्था। मजबूरी में मरीजों को निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां महंगा इलाज कराना उनकी विवशता बन गया है। नजदीकी गांव से पत्नी का इलाज कराने आए एक परिजन देवीदीन ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिले, दवाओं की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों और मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे मरीजों को डर और असुविधा दोनों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों व मरीजों के बताए अनुसार एक हफ्ते से अस्पताल में कोई डॉक्टर ड्यूटी पर नही आये हैं ।स्थानीय लोगों की जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन डॉक्टरों को नियुक्त किया गया है लेकिन एक हफ्ते से कोई भी डॉक्टर अस्पताल में ड्यूटी पर नही आये है। किस कारण से अस्पताल में डॉ ड्यूटी पर नही आ रहे मरीजों के लिए बड़े चिंता का कारण बना हुआ है और जिम्म्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए बैठे है।

 

अस्पताल परिसर में गंदगी, अव्यवस्था और लापरवाही का आलम यह है कि मरीजों के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। परिसर में आवारा कुत्तों का डेरा, गंदगी के ढेर और बदहाल व्यवस्थाएं अस्पताल की जमीनी हकीकत बयां कर रही हैं।

 

एक अन्य मरीज के परिजन ने बताया कि वह सुबह अपने बेटे को उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत पर अस्पताल लेकर पहुंचे थे, लेकिन वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। गंभीर एक्सीडेंट केसों के मामले में घायलों का प्राथमिक उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किसी संजीवनी वरदान से कम नहीं होता हैं। गंभीर रूप से घायलों को प्राथमिक उपचार मरीजों की जान बचाने में कारगर साबित होता हैं। वही आपराधिक मामलों में ऐसी भीषण गर्मी में पुलिस को एमएलसी के लिए हरपालपुर पीएचसी की जगह अब 30 किमी की दूरी तय कर नौगॉव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ रहा हैं जिसके चलते फरियादियों को अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने घंटो इंतज़ार करना पड़ता हैं। सबसे बड़ी समस्या उन प्रसूति महिलाओं के लिए जिनकी डिलेवरी के समय कोई समस्या आने और अंतिम समय में उनको इमरजेन्सी केस बताकर कर रैफर कर दिया जाता हैं। मजबूर होकर उन्हें निजी अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है।भीषण गर्मी के बीच अस्पताल में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा भी चरमराई हुई है। परिसर में लगा वाटर कूलर लंबे समय से बंद पड़ा है, जिससे मरीजों और परिजनों को पीने के पानी के लिए भी भटकना पड़ रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की यह बदहाली स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सवाल यह है कि जब भीषण गर्मी में मरीजों की संख्या बढ़ रही है, तब भी अस्पताल में डॉक्टर, दवाएं, पेयजल और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं।

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