Monday, February 23, 2026
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छतरपुर में ‘गुटखा माफिया’ बेलगामः राजश्री के नाम पर जेब कतर रहे जमाखोर, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल ! ये साहेब कैसी लूट है #जरा ध्यान दीजिए

छतरपुर में ‘गुटखा माफिया’ बेलगामः राजश्री के नाम पर जेब कतर रहे जमाखोर, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल !

ये साहेब कैसी लूट है #जरा ध्यान दीजिए

छतरपुर/हरपालपुर।जिले में इन दिनों ‘सफ़ेदपोश’ गुटखा माफियाओं का सिंडिकेट सक्रिय है, जिसने आम आदमी की जेब पर डाका डालना शुरू कर दिया है। राजश्री समेत नामी पान मसाला ब्रांड्स की कीमतों में रातों रात हुआ ‘कृत्रिम उछाल’ कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि अरबों रुपये के मुनाफे का एक सुनियोजित खेल
है। छतरपुर से लेकर हरपालपुर तक, पान मसाला अब ‘ब्लैक’ में बिक रहा है और प्रशासन मौन साधे बैठा है।
जमाखोरी का ‘गंदा खेल’ स्टॉक है, पर सप्लाई ‘गायब’ बाजार के विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो बड़े थोक व्यापारियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने गोदामों में माल डंप कर लिया है। बाजार में यह अफवाह फैलाई जा रही है कि “पीछे से माल महंगा आ रहा है,”
जबकि असलियत में यह कृत्रिम संकट पैदा कर गुटखा शौकीनों की मजबूरी का फायदा उठाने की साजिश है। एमआरपी (MRP) से 5 से 10 रुपये तक की अवैध वसूली हर गली-कूचे की दुकान पर आम हो गई है।
हरपालपुरः लूट का नया केंद्रः हरपालपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति और भी बदतर है। यहाँ छोटे दुकानदारों को डरा-धमकाकर सीमित माल
दिया जा रहा है, ताकि वे मजबूरी में ग्राहकों से से मोटी रकम वसूलें। उपभोक्ता बेहाल हैं, लेकिन बिना रसीद के इस काले धंधे के खिलाफ आवाज उठाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। सवाल यह है कि क्या ये बड़े सप्लायर अब सरकार और कानून से भी ऊपर हो गए हैं?
सप्लाई चेन में ‘सिंडिकेट’ का कब्जाः व्यापारियों का एक वर्ग दबी जुबान में स्वीकार करता है कि थोक विक्रेताओं ने एक
अलिखित ‘रेट लिस्ट’ जारी कर दी है। बिना किसी कंपनी आदेश के, मनमाने तरीके से दाम बढ़ा दिए गए हैं। यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है। त्योहारों और शादियों के सीजन को देखते हुए माफियाओं ने अभी से स्टॉक रोककर कीमतों को और ऊपर ले जाने की बिसात बिछा दी है।
कहाँ है प्रशासन का ‘हंटर’? बाजार में सरेआम हो रही इस लूट पर अब तक जिला
प्रशासन और खाद्य एवं औषधि विभाग की चुप्पी कई संदेह पैदा करती है।
क्या अधिकारियों को इस कालाबाजारी की भनक नहीं है? या फिर माफियाओं के रसूख के आगे सिस्टम ने घुटने टेक दिए हैं? आम नागरिक अब मांग कर रहे हैं कि सघन छापेमारी की जाए और गोदामों में डंप माल को जब्त कर कालाबाजारियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए

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