Monday, February 23, 2026
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पद्मश्री डॉ. अवध किशोर जड़िया की बुंदेली कविताओं ने मोहा मन, ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा

शिवम सोनी
छतरपुर। शहर के ऑडिटोरियम में उत्तर मध्य क्षेत्र संस्कृतिक केंद्र प्रयागराज एवं जिला प्रशासन छतरपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सात दिवसीय सांस्कृतिक विरासत कला उत्सव की चौथी शाम कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। शाम करीब 7 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम ने बुंदेलखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और लोकसंस्कृति को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षाविद डॉ. राजेंद्र दीक्षित,डाॅ. प्रीति रैना, जिला बार संघ अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह चौहान,महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय कार्य परिषद सदस्य नीरज भार्गव केयर इंग्लिश स्कूल के डायरेक्टर मनीष दोसाज मंचासीन रहे। अतिथियों ने बुंदेली भाषा और साहित्य को संरक्षित व संवर्धित करने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
कवि सम्मेलन के मुख्य आकर्षण बुंदेलखंड की शान, पद्मश्री से सम्मानित बुंदेली कवि एवं साहित्यकार डॉ. अवध किशोर जड़िया रहे। उन्होंने अपनी बुंदेली कविताओं के माध्यम से बुंदेलखंड की माटी, संस्कृति, संघर्ष और संवेदनाओं को शब्दों में पिरोकर प्रस्तुत किया। उनकी रचनाओं ने श्रोताओं के दिलों को छू लिया और पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गूंज से भर उठा।बुंदेली संस्कृति और विरासत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि हम कवि बुंदेली बानी के,झांसी की रानी के,
रामलला जित सांचे राजा ओरछा रजधानी के,हम कवि बुंदेली बानी के।
कवि सम्मेलन में अन्य प्रतिष्ठित कवियों ने भी अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। प्रयागराज से शैलेंद्र मधुर ने रचना पाठ करते हुए कहा-
हम हैं शंकर जहर ही पीते हैं, हम फटे ख्वाब रोज सींते हैं। हम हैं सीमा पै गोलियां खाते, हम तिरंगे का दर्द जीते हैं। ग्वालियर से पधारे हास्य व्यंग्य के कवि के. के. पांडे ने भ्रष्टाचार एवं बेरोजगार पर केंद्रित रचना पाठ कर श्रोताओं को गुदगुदाया। कवि सम्मेलन के संचालक ओज कवि अभिराम पाठक ने अपनी चर्चित एवं प्रतिनिधि कविता ‘भगत सिंह की फांसी’ का पाठ किया। मौलाना हारून अना कासमी ने गजल पढ़ते हुए कहा -“कम लोग हैं जो सच्ची इबादत में लगे हैं।
ऐसे तो बहुत हैं कि जो आदत में लगे हैं ।।”
महोबा सेआये शायर आमिल हबीबी ने कहा-“फूल के गालों का चुम्बन खुशबुएं लेती रहीं,
तितलियों के स्वप्न का अभिसार खंडित हो गया।”
हिंदी गजल के सशक्त हस्ताक्षर वीरेंद्र खरे ‘अकेला’ ने गजल पढ़ते हुए कहा-“छूना नहीं है चांद को तकना है दूर से, बस इल्तिजा यही है हमारी हुजूर से।” युवा शायर शबीह हाशमी ने कहा-‘वसीयत में करा लो मुझसे,अपनी जान कर दूंगा।
वतन की आन की ख़ातिर मैं सब क़ुर्बान कर दूंगा।।”
सभी रचनाकारों ने अपनी-अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कविताओं में सामाजिक सरोकार, प्रेम, देशभक्ति और मानवीय संवेदनाओं की झलक देखने को मिली।
कवि सम्मेलन के दौरान दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला। हर रचना पर तालियों की गड़गड़ाहट से ऑडिटोरियम गूंजता रहा। आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि बुंदेली भाषा और साहित्य आज भी जनमानस के दिलों में विशेष स्थान रखता है। कवि सम्मेलन के पश्चात आयोजन समिति द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर कवियों को सम्मानित किया गया।

*आज होगा पंडवानी और सूफी गायन*
रविवार को ऑडिटोरियम के मंच पर शाम 7 बजे से दुर्ग की कलाकार सम्प्रिया पूजा और टोली के द्वारा पांडवों की कथा पर आधारित जोशपूर्ण गायन पंडवानी की प्रस्तुति होगी तो वहीं स्थानीय मगर उत्कृष्ट स्तर की कलाकार अंशिका राजोतिया द्वारा सूफी गायन और भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी।गौरतलब है कि सभी दर्शकों के लिए यह आयोजन निःशुल्क है।

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