ई टोकन प्रणाली से किसानों को आसानी से मिल रहा खाद
घर बैठे ही ऑनलाइन बुक कर सकते हैं टोकन
किसान धर्मेंद्र दुबे ने बताया ई टोकन से आसानी से मिला खाद
लंबी कतारें, कालाबाजारी, अनियमित वितरण एवं बिचोलियों की भूमिका पर लगाम
छतरपुर।मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने एवं किसानों को आवश्यक संसाधनों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु ई-विकास प्रणाली की शुरुआत की गई है। यह एक डिजिटल प्रणाली है, जिसका उद्देश्य किसानों को उर्वरक प्राप्ति में होने वाली समस्याओं जैसे लंबी कतारें, कालाबाजारी, अनियमित वितरण एवं बिचोलियों की भूमिका को समाप्त करना है।
कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में जिलेभर में ई टोकन प्रणाली लागू की गई है। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि किसानों को प्रशिक्षण दे और प्रचार प्रसार करें जिससे किसान भाई आसानी से अपना टोकन बुक करा सकें और प्रक्रिया की फायदे और प्रक्रिया को समझ सकें। ग्राम पनागर के किसान धर्मेंद्र दुबे सटई रोड मंडी डबल लॉक खाद लेने पहुंचे। उन्होंने बताया कि ई टोकन बुक किया था जिससे खाद बहुत ही आसानी से मिल गया। न लाइन में लगना पड़ा और समय की भी बचत हुई।
*डिजिटल प्रक्रिया की कार्यप्रणाली*
इस प्रणाली के तहत
बेवसाइट etoken.mpkrishi.org पर जाकर रजिस्ट्रेशन एवं आधार वेरिफिकेशन के माध्यम से किसान को पंजीयन के उपरांत उर्वरक प्राप्ति के लिए एक ई-टोकन जारी किया जाता है। इस टोकन में किसान का नाम, पंजीयन क्रमांक, उर्वरक का प्रकार एवं मात्रा, वितरण केंद्र, निर्धारित तिधि और समय अंकित होता है। टोकन एसएमएस, मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। किसान निर्धारित समय पर संबंधित केंद्र से उर्वरक प्राप्त कर सकता है।
*प्रमुख लाभ*
पारदर्शी वितरण प्रणाली से प्रत्येक वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड, जिससे सरकारी निगरानी आसान हुई है। साथ ही समय की बचत, किसानों को लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं।
कालाबाजारी की रोकथाम, टोकन आधारित प्रणाली में बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी, रीयल-टाइम डेटा विश्लेषण, सरकार को उर्वरक की मांग और आपूर्ति पर नियंत्रण की सुविधा। डिजिटल सशक्तिकरण में किसानों को तकनीकी साधनों का उपयोग करने का अवसर मिल रहा है।
ई टोकन प्रणाली किसानों को उर्वरक वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्धता और सुगमता प्रदान करने हेतु विकसित की गई है। ई-विकास प्रणाली के अंतर्गत किसानों को उर्वरक प्राप्ति के लिए एक डिजिटल टोकन प्रदान किया जाता है, जिसमें उनकी आवश्यकतानुसार उर्वरक की मात्रा, वितरण केंद्र तिथि एवं समय का उल्लेख होता है। इससे वितरण केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ कम होती है, और किसानों को लंबी कतारों से राहत मिलती है।
प्रणाली रियल टाइम डेटा पर आधारित होती है, जिससे सरकार उर्वरकों की उपलब्धता और मांग का विश्लेषण कर वितरण को सुचारु रूप से संचालित कर सकती है। साथ ही, इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से कालाबाजारी और बिचौलियों की भूमिका को भी प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।
यह पहल डिजिटल कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल किसानों को सशक्त बनाती है बल्कि सरकारी संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन में भी सहायक है।
