Monday, February 23, 2026
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सांस्कृतिक विरासत उत्सव का भव्य शुभारंभ

सांस्कृतिक विरासत उत्सव का भव्य शुभारंभ

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छतरपुर।उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज और जिला प्रशासन छतरपुर के संयुक्त तत्वावधान में शहर के ऑडिटोरियम में सात दिवसीय विरासत कला उत्सव का आयोजन किया जा रहा है जिसमें प्रथम दिवस पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया और साथियों ने कबीर गायन प्रस्तुत करके दर्शकों को भावविभोर कर दिया।कार्यक्रम का शुभारंभ कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया।इस अवसर पर नपाध्यक्ष ज्योति चौरसिया, एस पी अगम जैन,सी ई ओ जिला पंचायत नमः शिवाय अरजरिया,सी एम ओ नपा माधुरी शर्मा, सहित अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया – जीवन परिचय

पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया भारत के प्रसिद्ध लोकगायक, कबीरपंथी संत और सामाजिक चेतना के सशक्त वाहक हैं, जिन्होंने कबीर के निर्गुण भजनों को अपनी सशक्त वाणी और मालवी लोकधुनों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया है। वे न केवल एक बेहतरीन गायक हैं, बल्कि एक विचारशील वक्ता, शिक्षाविद, और सामाजिक समरसता के प्रेरक भी हैं।

प्रहलाद सिंह टिपानिया जी का जन्म 7 सितम्बर 1954 को मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के लूणियाखेड़ी गाँव में हुआ था। एक सामान्य किसान परिवार में जन्मे टिपानिया जी की प्रारंभिक शिक्षा गाँव के ही विद्यालय में हुई। वे प्रारंभ से ही संगीत और अध्यात्म के प्रति आकर्षित रहे। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षक के रूप में भी कार्य किया है।

कबीरपंथ और भजन यात्रा:

टिपानिया जी की भजन यात्रा 1978 से शुरू हुई। उन्होंने कबीर, दादू, रमाई, और अन्य निर्गुण संतों के पदों को लोकधुनों और ख्यात वाद्ययंत्रों – जैसे खड़ताल, झांझ, मंजीरा, ढोलक और हारमोनियम – के माध्यम से प्रस्तुत करना शुरू किया। उनका गायन केवल संगीत नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार है। उनके भजनों में भक्ति के साथ-साथ सामाजिक चेतना, समरसता, और सांप्रदायिक सौहार्द की झलक मिलती है।

विदेश यात्राएँ और अंतरराष्ट्रीय पहचान:

प्रहलाद सिंह टिपानिया जी ने भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी कबीर के संदेश को पहुँचाया है। वे 15 से अधिक देशों में प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं, जिनमें अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, पाकिस्तान, यूएई, भूटान, नेपाल प्रमुख हैं। अमेरिका के लगभग 40 विश्वविद्यालयों में उन्होंने कबीर पर आधारित व्याख्यान और प्रस्तुतियाँ दी हैं, जिनमें हार्वर्ड, येल, स्टैनफोर्ड, बर्कले जैसे नाम भी शामिल हैं।

प्रमुख सम्मान और पुरस्कार:
1. पद्मश्री सम्मान (2011) – भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान हेतु प्रदान किया गया।
2. संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
3. कबीर सम्मान (म.प्र. सरकार द्वारा)
4. राष्ट्रीय कबीर समारोह में विशेष सम्मान

सामाजिक योगदान:

प्रहलाद सिंह टिपानिया जी केवल गायक नहीं, बल्कि एक विचारक और समाज सुधारक भी हैं। उन्होंने समाज में जाति-पांति, ऊँच-नीच और धर्म के नाम पर फैलाए जा रहे भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाई है। उनका जीवन कबीर की वाणी – “जाति न पूछो साधु की” – का जीता-जागता उदाहरण है।

फिल्म और डॉक्यूमेंट्री:

उनकी भजन यात्रा पर आधारित कई डॉक्यूमेंट्री और फिल्मों का निर्माण हुआ है। प्रसिद्ध डॉक्यूमेंट्री “Had-Anhad” (Seamless Journeys with Kabir by Shabnam Virmani) में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इससे उनकी ख्याति विश्व स्तर पर और भी बढ़ी।

उनके साथी कलाकारों में
अजय टिपनिया – ढोलक व सह गायन
देवनारायण सरोलिया – वायलिन सह गायन
धर्मेंद्र टिपानिया – हारमोनियम व सहगायन
मयंक टिपानिया – मंजीरा व सहगायन आदि रहे।

आज विरासत के मंच पर मध्यप्रदेश के वरिष्ठ रंगकर्मी और फिल्म कलाकार संजय मेहता के नाटक संत तुकाराम का मंचन होगा जिसमें संजय मेहता स्वयं अभिनय करते हैं।

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